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खुशखबरी: कोरोना वायरस को लेकर आई ये बड़ी News,इस वैक्सीन का हुआ सफल परीक्षण...

Coronavirus: Vaccine Created In Us Works On Mice, Doctors Likely To Experiment On Humans

न्यूयॉर्क:

कोरोना वायरस के मरीजों की संख्‍या दुनिया भर में दस लाख को पार कर चुकी है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इसका इलाज और इसकी सटीक दवा बनाने में जुटे हैं। इस वायरस का सबसे पहला शिकार बना चीन भी इसकी दवा को बनाने में जुटा हुआ है तो दूसरी तरफ अमेरिका के वैज्ञानिक दिनरात कोरोना का तोड़ ढूंढने में लगे हुए हैं।अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कोविड19 से जुड़ा एक वैक्सीन बनाया है जिसका सफल प्रयोग चूहे पर किया गया है। इस प्रयोग के दौरान देखा गया है कि एक स्तर पर आकर यह नए कोरोना वायरस के खिलाफ एक इम्युनिटी तैयार कर लेता है जो कि कोरोना के संक्रमण से बचा सकता है।

Third party image


पिटकोवैक( PittCoVacc) वैक्सीन:

गुरुवार को बताया कि जब इसका प्रयोग चूहे पर प्रयोग किया गया तो इस प्रोटोटाइप वैक्सीन ने दो सप्ताह के भीतर ऐंटीबॉडीज तैयार कर ली। इस वैक्सीन का नाम फिलहाल पिटकोवैक( PittCoVacc) रखा गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं की टीम को भरोसा है कि अगले कुछ महीनों में इसका प्रयोग इंसानों पर किया जा सकेगा.

Highlights:

  • दो हफ्तों के भीतर वायरस(Virus) को बेअसर करने के लिए पर्याप्त माना जाता है.

  • ऐंटीबॉडीज(Antibodies) ने दिखाई उम्मीद,

  • चूहे पर दिखा अच्छा रिजल्ट, अब इंसानों पर टेस्ट की तैयारी

Falo said, “We developed this to build on the original scratch method used to deliver the smallpox vaccine to the skin, but as a high-tech version that is more efficient and reproducible patient to patient. And it’s pretty painless — it feels kind of like Velcro.”



वैक्सीन बनाने पर पहले से ही काम कर रहा अमेरिका


कोरोना वायरस पर लगाम पाने के लिए अमेरिकी शोधकर्ताओं ने पहले टीके का परीक्षण किया है। शोधकर्ताओं ने 16-17 मार्च को टीके का परीक्षण करते हुए अमेरिका के सियाटल में एक महिला को कोरोना वैक्सीन की सूई लगाई थी। कोविड-19 का पहला टीका जेनिफर हैलर नाम की एक महिला को दिया गया| इस महिला के अलावा तीन और लोगों को टीका दिया गया। अब वैज्ञानिक इस वैक्सीन के असर का अध्ययन कर रहे हैं। वैज्ञानिकों के सामने अब ये साबित करने की चुनौती है कि ये टीका सुरक्षित है और सफलतापूर्वक संक्रमण को रोक पाता है।

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ब्लड प्लाज्मा का भी ले रहे सहारा उधर, अमेरिका के डॉक्टर स्वस्थ हो चुके मरीजों के ब्लड प्लाज्मा के जरिये इलाज की कोशिश कर रहे हैं। यह पद्धति 100 साल पुरानी है जब फ्लू के दौरान स्वस्थ हो चुके मरीज के ब्लड प्लाज्मा से बीमार मरीज का इलाज किया गया था। न्यूयॉर्क और अन्य शहरों में स्वस्थ्य हो गए कोरोना पेशंट गंभीर रूप से बीमार मरीजों की मदद के लिए अपना ब्लड डोनेट कर रहे हैं।




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